झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी कलह के संकेत, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 18 मई तक संयम रखने का किया ऐलान
Signs of internal strife within the Jharkhand
Signs of internal strife within the Jharkhand, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के कुछ निर्णयाें से नाराज चल रहे वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से मिलने शुक्रवार को देर रात पूर्व सांसद धीरज साहू तथा मंत्री इरफान अंसारी उनके अशोकनगर स्थित आवास पर पर पहुंचे। इस दौरान तीनों नेताओं के बीच पार्टी संगठन, वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों तथा विभिन्न सामाजिक एवं संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वे पार्टी के कुछ निर्णयों से आहत अवश्य हैं, लेकिन पार्टी हित को सर्वोपरि मानते हुए 18 मई तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वे झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू से मुलाकात कर अपनी बात विस्तारपूर्वक रखेंगे।
18 मई तक वे संयम बनाए रखेंगे
वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने जो बातें कही हैं, वे पार्टी विरोधी नहीं, बल्कि पार्टी हित, सामाजिक न्याय और सम्मान से जुड़ी बातें हैं। उन्होंने पार्टी के दोनों नेताओं को आश्वस्त किया कि 18 मई तक वे संयम बनाए रखेंगे और अपनी बात पार्टी आलाकमान के समक्ष रखेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी में दलितों, अल्पसंख्यकों एवं कमजोर वर्गों की भागीदारी और सम्मान सुनिश्चित होना अत्यंत आवश्यक है। समय रहते संवाद और समाधान की प्रक्रिया अपनाई जाए, तभी संगठनात्मक मजबूती एवं सकारात्मक माहौल कायम रहेगा।
सार्वजनिक बयानबाजी से बचने का सुझाव
मुलाकात के दौरान धीरज साहू ने सार्वजनिक बयानबाजी से बचने का सुझाव देते हुए कहा कि सार्वजनिक बयानबाज़ी से भाजपा राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी अंदरूनी मुद्दों का समाधान संगठनात्मक मंच पर आपसी संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
वहीं, इरफान अंसारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से दलितों, अल्पसंख्यकों एवं कमजोर वर्गों के सम्मान और अधिकारों की पक्षधर रही है और आगे भी रहेगी। उन्होंने वित्त मंत्री की बातों को पार्टी आलाकमान तक पहुंचाने का आश्वासन देते हुए कहा कि फिलहाल संवाद, संयम और संगठनात्मक एकता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
प्रदेश अध्यक्ष के विरुद्ध मुखर
बताते चलें कि राधाकृष्ण किशोर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विस्तार के बाद लगातार प्रदेश अध्यक्ष के विरुद्ध मुखर हैं। उन्होंने प्रदेश प्रभारी को पत्र लिखकर उनके निर्णयों पर सवाल उठाया है तथा कांग्रेस द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर उनकी उदासीनता पर सवाल उठाया है। यहां तक कि अप्रत्यक्ष रूप से उनके हटाने की भी वकालत की है।